Master Hindi

Viniyog Parivar Trust Is An NGO Working Under The ‘‘Jain Sangh”
Donation Exempted Under S. 80 (G) Of Income Tax Act. Registered Under Foreign Contribution (Regulation) Act.

अनात्मवाद के आक्रमण का प्रतिकार, आत्मवाद के सिद्धांतो की रक्षा एवं पुन:स्थापना के
प्रति समर्पित संस्था विनियोग परिवार द्वारा प्रस्तुत..

संस्कृति रक्षा अभियान

 

धर्म-पुरुषार्थ

अर्थ-पुरुषार्थ

काम-पुरुषार्थ

मोक्ष-पुरुषार्थ

जब विश्व की श्वेत प्रजा का हित हो व अश्वेत प्रजा का संपूर्ण विध्वंस हो, इस हेतु से सन् 1493 में
सर्वोच्च ईसाई धर्मगुरु पोप द्वारा जारी किये गये पपल बुल (पोप का फतवा) के अमल द्वारा पृथ्वी पर
महा-अशांति, महा-हिंसा एवं महा-शोषण के वातावरण का सृजन हो चुका है, तब...

संस्कृति रक्षा अभियान... किस लिए

  • क्योंकि, मोक्षलक्षी आर्य जीवन-प्रणालिका के धार्मिक, सामाजिक, राजकीय एवं आर्थिक अंग तथा विशेष रुप से आर्थिक अंग में समाहित पशुओं पर आधारित अहिंसक एवं पोषक अर्थ-व्यवस्था के स्थान पर अनार्य जीवन पद्धति को पोषक बनानेवाली प्रचंड यंत्रों पर अधिष्ठित एक शोषक एवं हिंसक जीवन-प्रणालिका का आरोपण किया जा रहा है... एक भद्र, सुसंस्कृत प्रजा-समुदाय को शनैः शनैः हिंसक पशुओं में परिवर्तन करने के लिए चक्र गतिमान हुए हैं...
  • क्योंकि, अश्वेत प्रजा के पारंपारिक उद्योग क्षेत्रों को तहस-नहस करने के लिए षड्यंत्र रचे जा चुके हैं । देश का समस्त अर्थतंत्र अस्तव्यस्त हो चुका है । देश के मस्तक पर कर्ज के पहाड़ बन चुके हैं । अधिकतर वित्तीय संस्थाएँ (Bank) भीतर से जीर्ण एवं खोखली बन गयी हैं । बहुराष्ट्रीय उद्योगों के आक्रमण से स्थानीय प्रजा के उद्योग धंधे नष्ट हो रहे हैं । हजारों - लाखों सामान्य मनुष्यों से उनकी नौकरियाँ छिनी जा रही है...
  • क्योंकि, सामाजिक क्षेत्र का भविष्य भी भयंकर बन रहा है । संयुक्त परिवार व्यवस्था का स्थान विभक्त परिवार व्यवस्था ने ग्रहण किया है । अत शिशु के लिए सुसंस्कार, सदाचार पालन की अनुकूलता का विनाश हो रहा है । वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम एवं मस्तिष्क के असंतुलन का उपचार करने वाले अस्पतालों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है...
  • क्योंकि, भारतीय रसोईगृहों में विशेष रुप से पालन की जानेवाली भक्ष्याभक्ष्य विवेक की व्यवस्था का विनाश कर प्रजा को स्वेच्छा से अथवा अनिच्छा से अभक्ष्य भक्षण करने के लिए विवश करानेवाली परिस्थिति का निर्माण हो रहा है..
  • क्योंकि, युनो से संलग्न संस्था `फाओ' भारतीय प्रजाजनों के मुख से विशुद्ध गोरस एवं घी जैसे सात्विक पदार्थों को छीनकर उन्हें अपोषण एवं कुपोषण की गर्ताओं में धकेल देने की योजनाएँ बना रही है । यह षडयंत्र केवल भारतीय ही नहीं, परंतु समस्त अश्वेत प्रजा के विनाश के लिए रचा गया है । अस्पतालों में रुग्णों की संख्या में प्रतिपल वृद्धि हो रही है - रोग का सुयोग्य निदान एवं उपचार करनेवाले आयुर्वेद को ही अब पुनर्जीवित कराना आवश्यक हो गया है...
  • क्योंकि, खाद्य-प्रक्रिया (Food Processing) का नाम देकर, उद्योग, व्यापार बढ़ाकर या प्रजा के लिए आजीविका उपलब्ध कराने का वचन देकर बहुराष्ट्रीय कंपनीयाँ इस देश का पर्यावरण एवं जीवसृष्टी तहसनहस करने के लिए प्रयत्नरत हैं, व उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए भारतीय शासनव्यवस्था प्रतिदिन एक नयी हिंसक योजना बना रही है...
  • क्योंकि, पशु आधारित भारतीय कृषि व्यवस्था एवं पशुपालन व्यवस्था के स्थान पर रासायनिक खाद, विषैले जंतुनाशक, ट्रैक्टर एवं यंत्रों पर आधारित कृषिव्यवस्था आ गयी है, पशुओं की संकरित प्रजातियों के कारण विशुद्ध दूध अप्राप्य बन चुका है । अत पारंपारिक कृषक व पशुपालकों के हाथों से निकलकर कृषि व पशुपालन बहुराष्ट्रीय कंपनीयों के हाथों में आ गये हैं...
  • क्योंकि, वर्तमान न्याय व्यवस्था पश्चिमी विचारसरणी के आधार पर रेंगती है । आज न्यायदान करते समय सामाजिक प्रथा, अपराधी की सामाजिक, पारीवारिक एवं मनोवैज्ञानिक परिस्थितियों का विचार नहीं किया जाता । लिखित धारा पुस्तकों के आधार पर न्यायदान किए जाने से भारतीय न्याय व्यवस्था एवं स्वयं न्याय का अस्तित्व मिट रहा है...
  • क्योंकि, शिक्षा क्षेत्र में `सा विद्या या विमुक्त्ये' इस सूत्र का शिक्षा शास्त्रीओं को विस्मरण हो गया है । अत छात्रों को भौतिकवाद की अंधी दौड़ में दौड़ने के लिए विवश करने वाली, नयी पीढ़िओं का शैशवकाल में ही अधपतन करने वाली मेकॉले शिक्षा पद्धति अपनी मजबूत जड़ जमा चुकी है...
  • क्योंकि, धर्म क्षेत्र पर भी नये संविधान को लादा गया है, अत राजसत्ता धर्मसत्ता से अधिक बलशाली हो चुकी है । पब्लिक ट्रस्ट ऍक्ट जैसे कानूनों द्वारा धार्मिक संपत्ति के उपर राज्यसत्ता का नियंत्रण स्थापित किया गया है । विकास / पुननिर्माण का नाम देकर धार्मिक स्थलों को पर्यटन के स्थानों में परिवर्तित किया जा रहा है । विविध कानूनों के माध्यम द्वारा राज्यसत्ता ने धर्मक्षेत्र के संचालन को दृढतापूर्वक जकड़ रखा है...
  • संक्षेप में, अहिंसा का पालन हो सके एवं अत्यल्प आवश्यक्ताओं द्वारा सुयोग्य रीति से जीवन का गुजारा हो सके इस हेतु आर्य संतो द्वारा निर्मित संस्कृति / जीवन व्यवस्था पर गत पांचसो वर्षों में असाधारण आक्रमण हो चुका है । यदि हम इन आक्रमणों को प्रभावहीन करने के लिए योग्य उपाय योजना नहीं करते हैं, तो समस्त जीवजाति के लिए पोषक एवं रक्षक राजकीय, आर्थिक, सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्था का विनाश अटल है, और उसके स्थान पर शोषण तथा हिंसा पर आधारित अनार्य संस्कृति का आगमन अनिवार्य है । यह नूतन संस्कृति हमारी व्यवस्थाओं को क्षतविक्षत कर अपना स्थान दृढ बनाएगी ।

संस्कृति रक्षा अभियान... क्या किया जा सकता है

  • प्रजा जीवन से जीवन मूल्यों का उच्चाटन करना यही अनवरत हिंसा का मूल आधार है, ऐसा करने से भविष्य में मानव संहार अटल है । प्रजा के चिरंतन जीवन मूल्यों को चिरंजीव बनाना... यही है संस्कृति रक्षा अभियान
  • युगों के संशोधन एवं अन्वेषण द्वारा स्वयं सिद्ध आर्य संस्कृति जनित विकास की भारतीय अवधारणा पर आधारित आर्थिक, सामाजिक, राजकीय एवं धार्मिक क्षेत्रों में व्यवस्थाओं का पुनर्स्थापना ।
  • सचराचर विश्व की जड़-चेतन सृष्टी पर अपना स्वामित्व घोषित करनेवाले, मानवों को क्रितदास बनानेवाले, संपूर्ण विनाशकारक 1493 में उद्घोषित पपल बुल (PAPAL BULL) की तलस्पर्शी जानकारी, उसके अंतर्गत बनाया गया षड्यंत्र एवं उस बुल द्वारा स्थापित विनाशक व्यवस्था का संपूर्ण वासव चित्रण... एवं उस बुल के विरोध में आंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष ।
  • प्राचीन ऋषिमुनिओं द्वारा निर्मित एवं विकसित शिल्पों एवं कलाओं की रक्षा जिसमें समाहित है, वैसी कृषि का भारतीयकरण, एवं प्राकृतिक खाद पर आधारित कृषि एवं प्राचीन कला कारीगरी पर आधारित ग्राम्य उद्योगों का पुनरुद्धार ।
  • अनिवार्य एवं अल्पतम हिंसा पर आधारित जीवन व्यवस्था की सांगोपांग रक्षा एवं संवर्धन ।
  • हिंसा को प्रोत्साहन देनेवाले कानूनों / नीतियों के विरुद्ध अभियोग तथा हिंसा को नियंत्रित करानेवाले कानूनों को आचरण में लाने का प्रयास ।
  • देश के अनमोल पशुधन की रक्षा एवं अर्थतंत्र में पशुओं की केंद्र स्थान पर पुनर्स्थापना ।
  • देश से मांस की निर्यात को बंद कराने के लिए आंदोलन ।
  • पशुओं को निरुपयोगी बनानेवाली अर्वाचीन कृषिपद्धति, पशुपालन एवं जीवनपद्धति का बहिष्कार ।
  • गोशालाओं को वित्तीय बोझ से बचाकर स्वावलंबी बनाने के लिए आयोजन ।
  • जनहित विरोधी शासकीय नीतियों के विरोध में प्रचंड आंदोलन ।
  • प्रचार प्रसार माध्यमों द्वारा भारतीय संस्कृति पर चलते आए पश्चिमी आक्रमण का प्रतिकार ।
  • प्रखर प्रचार अभियान एवं जन संपर्प द्वारा जनजागृति ।
  • अकाल, भूकंप एवं अन्य प्राकृतिक प्रकोप एवं दुर्घटनाओं के समय सेवा कार्य ।
  • धर्मक्षेत्रों का आक्रमणों से संरक्षण ।
  • संक्षेप में : धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष पर आधारित मोक्षलक्ष्यी जीवन व्यवस्था का पुनरुद्धार ।

संस्कृति रक्षा अभियान... दृढ निश्चय ही सिद्धिओं का महाद्वार है ।
(कार्य एवं सिद्धि)

  • आर्य संतो द्वारा निर्मित तथा विकसित जीवन व्यवस्था पर गत पांच सौ वर्षों से जो असाधारण आक्रमण हुए, उनके परिणामों को किंचित निष्फल करने के लिए एवं उनमें अवरोध निर्माण करने के लिए विनियोग परिवार द्वारा गत दस वर्षों में अनेक आयोजन किए गए हैं ।
  • ई.स. 1493 में विश्व की समग्र अश्वेत प्रजा को नामशेष करने का षड्यंत्र आंतरराष्ट्रीय स्तर पर रचा गया था । इस षड्यंत्र के मूलस्त्रोत पपल बुल का तथा इस षडयंत्र का तलस्पर्शी अभ्यास प्रखर विद्वान एवं चिंतक स्व. प्रभुदास बेचरदास पारेख द्वारा किया गया था । इस बुल व षड्यंत्र का सांगोपांग परिचय करानेवाले 3000 लेख / निबंधों का सुवाच्य पुनर्लेखन, भाषांतर एवं प्रचार का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है ।
  • सन 1998 में भारत सरकार ने वास्को-द-गामा के भारत प्रवेश की 500वीं वर्षगांठ उत्साहपूर्वक मनाने का विचार किया था । पारतंत्र एवं हिंसा के एक नृशंस दौर का आरंभ करानेवाली इस लज्जास्पद घटना की वर्षगांठ धूमधाम से मनाये जाने के विरोध में विनियोग परिवार तथा अन्य पांच संस्थाओं द्वारा देशव्यापी सभा, प्रदर्शन एवं पत्रकार परिषदों का आयोजन किया गया जिन में आफ्रिका एवं ऑस्ट्रेलिया की मूल प्रजा के प्रतिनिधिओं को भी आमंत्रित किया गया था । अंत में भारतशासन अपना निर्णय परिवर्तित करने के लिए विवश बना ।
  • आंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित महत्त्वपूर्ण पुस्तकों की थोख खरीदी एवं अभ्यासक संशोधन के लिए उनका निशुल्क वितरण । इन पुस्तकों में से कुछ पुस्तकों के नाम :- DIET FOR NEW AMERICA, HOW THE OTHER HALF DIES, SILENT SPRINGS, AN AGRICULTURAL TESTAMENT, HARVEST OF DEVASVATION, THE AMERICAN HALOCAUST, THE ARCHAELOGY OF DEVELOPMENT.. इत्यादि
  • स्व. वेणीशंकर मुरारजी वासु द्वारा लिखित पुस्तक / निबंध / लेख / परिपत्र इत्यादि का व्यापक स्तर पर हजारों की संख्या में मुद्रण एवं निशुल्क वितरण, विविध क्षेत्रों के विद्वानों द्वारा लिखित ग्रंथों का उनके गुजराती, अंग्रेजी एवं हिन्दी अनुवाद के साथ प्रचार-प्रसार । विनियोग परिवार द्वारा सर्जित मौलिक साहित्य / लेख / निबंध / परिपत्र / विज्ञापन / सामयिक ``विनियोग समाचार'' इत्यादि का व्यापक प्रचार ।
  • विनियोग परिवार के कार्यकर्ता सतत जनसंपर्प में व्यस्त रहते हैं । अपने समक्ष आनेवाले प्रत्येक अवसर का उपयोग वे विनियोग के उद्देश, कार्य, विचार इत्यादि की चर्चा के लिए करते हैं । `वन-टु-वन ग्रुप डिस्कशन्स' एवं मिनी-सभाओं का व्यापक स्तर पर आयोजन किया जाता है ।
  • प्रचार-प्रसार द्वारा सत्ता स्थानों पर विराजमान अनेक सहृदय व्यक्तिओं के आमूलाग्र मानस परिवर्तन के लिए दुरगामी प्रयास । योजना आयोग (PLANNING COMMISION) द्वारा बनायी गई कतलखानों की महायोजना रद्द कराने के लिए सफल अभियान किया गया ।
  • देश के अग्रगण्य बुद्धिजीवी, सत्ता स्थानों पर विराजमान महानुभाव, आई.ए.एस. अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट / हाई कोर्ट के न्यायाधीश - वकील, शालाओं के मुख्य अध्यापक, अध्यापक, समाचार पत्रों के संपादक, पत्रकार इत्यादि का पत्रव्यवहार द्वारा मानस-परिवर्तन कराने का सफल प्रयास ।
  • मुंबई के पायधुनी स्थित श्री शांतिनाथजी के जिनालय का पुरातत्त्व विभाग द्वारा पुरातन स्थापत्य सूचि में समावेश किया गया था । विनियोग परिवार द्वारा सतत एक वर्ष के राजकीय एवं न्यायक्षेत्र में कठोर पुरुषार्थ के पश्चात शासन अपना निर्णय बदलने पर विवश हुआ । पुरातत्त्व विभाग के इतिहास में यह घटना अजोड़ मानी जाती है । सुप्रीम कोर्ट में विरोधी पक्षों द्वारा की गयी अपीलों में भी विनियोग परिवार की जीत हुई ।
  • सन् 1997 में गुजरात शासन ने गिरनार तीर्थ पर रोप वे बनाने का निर्णय लिया था । इस निर्णय के विरोध में सघन आंदोलन का आयोजन किया गया । प्रभावी चित्र / परिपत्र / पत्रिकाओं के माध्यम से प्रखर जनजागरण कराया गया । राज्य तथा केन्द्रशासन के मंत्री महोदयों से प्रत्यक्ष वार्तालाप किया गया । अंत में गुजरात शासन ने इस निर्णय को अस्थायी रुप से विलंबीत किया ।
  • वढवाण में ऑटोरिक्षा के स्थान पर बैलगाड़ियों का अनूठा प्रयोग वढवाण महाजन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ । ऑटोरिक्षा के खरीदी के लिए जितनी धनराशि `मार्जिन मनी' के तौरपर दी जाती है, उतनी ही धनराशि में एक बैलगाड़ी व्यवसायी बंधुओं को किफायती मूल्य में मिले ऐसी व्यवस्था की गयी । इस प्रकार पर्यावरण सुरक्षा, जीवरक्षा एवं स्वावलंबन इन तीन लक्ष्यों की प्राप्ती की गयी ।
  • ट्रस्ट एवं ट्रस्ट-डीड बनाते समय शास्त्रों पर आधारित मार्गदर्शन किया जाता है । इसके अतिरिक्त मुंबई पब्लिक ट्रस्ट ऍक्ट की व्याप्ती में आनेवाली समस्याओं के लिए मार्गदर्शन किया जाता है ।
  • 26 जनवरी 2001 के दिन गुजरात राज्य को जिस प्रलयकारी भूकंप ने जर्जर किया था उसका प्रतिकार करने के लिए विनियोग परिवार ने बड़ी मात्रा में पुनर्वसन का कार्य किया । तात्कालिन राहतसामग्री एवं धनराशि की सहायता से लेकर भूकंप प्रभावित परिवारों के पुनर्वसन तक का कार्य किया । प्राचीन परंपरा एवं पद्धतियों के आधार पर गारे मिट्टी के 700 ऐसे भवनों का निर्माण कराया है जो भविष्य में भूकंप से प्रभावित नहीं होंगे । भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए 1 करोड़ 66 लाख रु. की कुल राशि का प्रयोग हुआ ।
  • 1993 में कर्मभूमी महाराष्ट्र स्थित लातूर गांव में आए भूकंप के पश्चात वर्धमान संस्कृति धाम एवं विनियोग परिवार द्वारा राहतकार्य किया गया था । लामाणी तांडा नामक गांव में लगभग 40 भूकंपप्रूफ घरों का निर्माण एवं अर्पण हुआ था ।
  • गुजरात के विनाशक भूकंप के पश्चात पुनर्वसन के लिए `ओड' नामक ज्ञाति के सदस्यों की सहायता से प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग करके अत्यल्प धनराशि में घरों का निर्माण किया गया । बचत के साथ साथ एक पारंपारिक कला को जीवित रखने का यह प्रशंसापात्र प्रयास था ।
  • कच्छ की भूमि में लुप्त प्राय होती `थरपारकर' प्रजाति की गायों की रक्षा का कार्य आरंभ हुआ है । तीन वर्ष पहले एक गोयुगल से प्रारंभ कर आज 42 गाय, बैल एवं गोवत्सों का गोकुल यहाँ देखा जा सकता है । कई गोवत्स सांढ का कार्य करेंगे । इसी तरह वढवाण में गीर वंश के पशुओं की रक्षा के लिए प्रयत्न विनियोग परिवार द्वारा किये जा रहे हैं ।
  • गुजरात, राजस्थान एवं महाराष्ट्र के पशुओं के शरीर तथा पचन के लिए अनुकूल घास के असंकरित, विशुद्ध बीज प्राप्त कर, उनका घास डगाने के लिए प्रयोग हो रहा है ।
  • परंपरा तथा जयणा का पूरापूरा आग्रह रखकर संस्कृति पोषक प्रसंगों को मनाने के लिए सहकार दिया जाता है । ऐसे समारोहों में 64-72 कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है, जिससे प्रजा अपनी गरीमामय संस्कृति से परिचित हो व कलाकारों की आजीविका की स्थायी व्यवस्था हो सके ।
  • ग्रामीण पशु एवं पशुपालकों के लिए मृत्युसंदेश स्वरुप अकाल एवं सूखे के प्रतिकार के लिए नीरण केन्द्राsं की स्थापना की जाती है - वि.सं. 2056 के अकाल समय में कुल 1 करोड़ 58 लाख रु. की धनराशि का व्यय हुआ । लगभग 10,600 टन घास पशुओं को खिलवाया गया, लगभग 2 लाख पशुओं के जीवन की रक्षा की गयी । वि. सं. 2057 के अकाल में लगभग 1 लाख पशुओं के जीवन की रक्षा हुई । इस तरह प्रति वर्ष अकाल के लिए राहत कार्य किया जाता है ।
  • अकाल के समय में गोशालाओं के लिए दान के अलावा की अन्य आवक पर राज्यशासन द्वारा लगाया गया पब्लिक ट्रस्ट्स एडमिनिस्ट्रेशन फंड माफ हो जाए इस हेतु गुजरात शासन से असरकारक चर्चा ।
  • गुजरात राज्य की शालाओं में सिखाये जानेवाले पाठ्याक्रम में आमूलाग्र परिवर्तन कर उन्हें पश्चिम के प्रभाव से मुक्त करने के लिए पाठ्यपुस्तकों का पुनर्लेखन ।
  • अवैध रुप से कतलखाने में पहुँचायें जानेवाले 2 लाख से अधिक मूक पशुधन को यमपाश से मुक्त किया गया, पशुओं की रक्षा एवं संवर्धन कार्य के प्रति समर्पित पांजरापोल एवं गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मार्गदर्शन । अकाल के समय पांजरापोलों को सहायता दी गयी । भूतदया के कार्य के प्रति समर्पित अनेक संस्थाओं की सुयोग्य जाँच की गयी व सुपात्र संस्थाओं को आज तक कुल 2.5 करोड़ रु. कि वित्तीय सहायता की गयी ।
  • पक्षियों पर होनेवाले अमानवीय अत्याचार तथा उनके अवैध क्रय-विक्रय पर अंकुश रखनेवाला अभूतपूर्व निर्णय अक्तूबर 1997 में मुंबई हाई कोर्ट द्वारा प्राप्त करवाया, मुंबई एवं नवी मुंबई में प्रतिवर्ष होनेवाली हज्जारों कुत्तों की निर्मम हत्या वैधानिक कार्यवाही द्वारा 1994 से स्थगित करवायी ।
  • गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों में गो-वंश बंदी के लिए नये कानूनों का निर्माण करवाया ।
  • प. बंगाल में बकरी ईद के अवसर पर होनेवाली गो-हत्या असंवैधानिक है, अत उसके विरोध में नवम्बर 1994 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्णय प्राप्त किया ।
  • मांस निर्यात के लिए बनाये गये विशाल कतलखानों के विरोध में वैधानिक स्तर पर युद्ध का प्रारंभ । अल-कबीर, पंजाब मीट के विरोध में जनहित याचिका दायर की गई ।

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