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Viniyog Parivar Trust Is An NGO Working Under The ‘‘Jain Sangh”
Donation Exempted Under S. 80 (G) Of Income Tax Act. Registered Under Foreign Contribution (Regulation) Act.

शासन रक्षा

  • जैनों का अल्पसंख्यक श्रेणी में समावेश न होने देना : पू. आचार्य भगवंतश्री रामचंद्रसूरिश्वरजी (डेहलावाला), पू. जंबुविजयजी म.सा. तथा अन्य महात्माओं के सहयोग से 1993 में केन्द्राrय स्तर पर जैन धर्म के अनुयायियों को अल्पसंख्यक श्रेणी में शामिल करने के केन्द्र सरकार के निर्णय को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया । आज तक वैसी ही स्थिति रही है ।
  • गिरनार रोप-वे : गुजरात में गिरनार तीर्थ में रोप-वे निर्मित करने का निर्णय गुजरात सरकार की ओर से वर्ष 1998 में लिया गया । रोप-वे निर्माण के विरुद्ध सघन आंदोलन चलाया गया । प्रभावी पोस्टर, पत्रिकाएं बनाकर जनजागरण किया गया । राज्य और केन्द्र सरकार तथा मंत्रियों को ज्ञापन दिया गया और अंत में सरकार ने इस प्रकल्प को ठंडे बस्ते में डाल दिया ।
  • श्री शांतिनाथजी देरासर : मुंबई में पायधुनी स्थित श्री शांतिनाथजी देरासर को पुरातत्त्व विभाग की सूची में शामिल किया गया था । लगातार एक वर्ष तक राजनीतिक स्तर पर और कानूनी मेहनत कर इस देरासर को पुरातत्त्व विभाग की संरक्षित स्मारकों की सूची से अलग कराया गया, जो अभी तक के पुरातत्त्व विभाग के इतिहास में मात्र एक ही उदाहरण है । उसके बाद उस देरासर का जीर्णोद्धार हुआ । सुप्रीम कोर्ट में प्रतिपक्षों द्वारा की गई अपील में भी विनियोग परिवार ने विजय हाँसिल की ।
    ट्रस्टों तथा ट्रस्ट डीड बनाने के लिए शास्त्र-आधारित मार्गदर्शन दिया जाता है । इसके अतिरिक्त मुंबई पब्लिक ट्रस्ट एक्ट से संबंधित मुद्दों के विषय में भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाता है ।
  • श्री शत्रुंजय गिरिराज - गिरिवर दर्शन विरला ही पाता है : पालिताणा में विकास के नाम पर विनाश फैलाने वाली `पर्यावरणीय पुनरोद्धार' नामक योजना को श्री जैन संघों को जागृत कर रोका गया और उसके द्वारा तीर्थरक्षा करने में निमित्त बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।
  • अलायन्स फॉर रिलिजियस कॉन्जरवेशन (ए.आर.सी.) जैसी विदेशी संस्थाओं से संपर्प कर पालिताणा को वैश्विक स्तर पर प्रगट करने की गंभीर भूल का प्रतिकूल परिणाम सहन करने के दिन आए, वह भय आज के युग में जरा भी अकल्पनीय नहीं है।
  • अब शायद विदेशी सहायता से इनकार किया भी जाए, तो भी इस प्रकरण से काफी अहित हो चुका है । हमारा परम पवित्र तीर्थ विश्व के पर्यटन नक्शे पर अब चमक गया है । अनेक विदेशी संस्थाओं की इस स्थल में रुचि पैदा हुई है । खुद विश्व बैंक की शत्रुंजय के विकास में रुचि जगी है, ऐसा जॉन स्मिथ (ए.आर.सी. के प्रतिनिधि) ने भी कहा था । उसके पर्यटन-विकास के लिए भविष्य में आंतरराष्ट्रीय या सरकारी दबाव आने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता । गुजरात सरकार द्वारा एसे `विकास-कार्य' की योजना भी बन चुकी है
  • विदेशी संस्था को गिरिराज की पवित्रता में कोई रुचि नहीं होगी । उसे तो पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने में ही रुचि होगी, यह कोई सामान्य व्यक्ति भी समझ सके, वैसी बात है ।
  • ए.आर.सी. ने (3IG) अर्थात् आंतरराष्ट्रीय, अंतरधर्मीय, पूंजी निवेश समूह नामक उसकी एक उप-संस्था का गठन किया है जिसके कार्यों में शामिल है - पर्यावरण उन्मुख रुख के संबंध में दीर्घकालीन परिवर्तन के लिए धार्मिक परम्पराओं में प्रणालीगत परिवर्तन के लिए संस्थागत आधार तैयार करना आदि.....
  • तीर्थ-स्थानों की पवित्रता को जोखिम में डालने वाले आक्रमणों के बारे में सदैव जागृत रहने / करने की चेष्टा विनियोग परिवार करता है ।
  • केन्द्र सरकार द्वारा पाठशालाओं में सेक्स शिक्षा का विषय सन् 2007 से शामिल होने वाला था । संस्कृति का सर्वनाश करने वाले इस कदम के खिलाफ परमपूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजयरत्नसुंदर सूरिश्वरजी म.सा. ने मुहिम शुरु की । विनियोग परिवार द्वारा श्री जटायु लिखित पुस्तिका `रेड अलर्ट' का गुजराती, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रकाशन किया गया जिससे पूरे देश में जागृति आयी और पांच राज्यों में इस शिक्षा का पाठ्यक्रम घोषणाबद्ध तरीके से वापस ले लिया गया है । अन्य राज्यों में भी मामला ढुलमुल है ।

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